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🏛️ जीवन और दर्शन
“मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, लेकिन हर जगह वह जंजीरों में है”
समाज के मानदंड और नियम कभी-कभी प्रतिबंधित महसूस कर सकते हैं। हमारी जन्मजात स्वतंत्रता और व्यक्तित्व को न भूलें।
“मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, और हर जगह वह जंजीरों में है।”
— जीन-जैक्स रूसो
“मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, लेकिन हर जगह वह जंजीरों में जकड़ा होता है।”
“वास्तविकता की दुनिया की सीमाएँ होती हैं; कल्पना की दुनिया असीमित है।”
“मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, लेकिन हर जगह वह बेड़ियों में जकड़ा होता है।”
“मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, लेकिन हर जगह वह जंजीरों में जकड़ा है।”
“वास्तविकता की दुनिया की सीमाएँ हैं; कल्पना की दुनिया असीमित है।”