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🧠 मन और आत्मा
“दुःख की जड़ आसक्ति है।”
आसक्तियों को छोड़ दो। वे केवल दुःख की ओर ले जाते हैं। छोड़ने के साथ आने वाली स्वतंत्रता को अपनाओ।
“आप स्वयं, पूरे ब्रह्मांड में किसी भी अन्य की तरह, आपके प्रेम और स्नेह के योग्य हैं।”
— बुद्ध
“मन सब कुछ है। आप जैसा सोचते हैं वैसा ही बन जाते हैं।”
“शांति भीतर से आती है। इसे बाहर मत खोजो।”
“अतीत में मत रहो, भविष्य का सपना मत देखो, मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करो।”
“मन सब कुछ है। जो आप सोचते हैं, आप बन जाते हैं।”
“जीवन में असली असफलता यह है कि जो हम जानते हैं उसमें सच्चे नहीं होना।”