🧘 आत्म-सम्मान और आत्म-प्रेम
“कभी भी चुप्पी में डराया न जाए। कभी खुद को पीड़ित बनने की अनुमति न दें।”
आप जितना सोचते हैं उससे ज्यादा मजबूत हैं। किसी को भी आपकी आवाज़ छीनने न दें।
“कभी भी चुप्पी में डराया न जाए। कभी खुद को पीड़ित बनने की अनुमति न दें।”
आप जितना सोचते हैं उससे ज्यादा मजबूत हैं। किसी को भी आपकी आवाज़ छीनने न दें।