हम जो सोचते हैं कि हम जानते हैं वह कितना तुच्छ है, यह समझते ही सच्चे ज्ञान का द्वार खुल जाता है। लगातार सीखें, खोजें और खुद को बढ़ाएं।
हम जो सोचते हैं कि हम जानते हैं वह कितना तुच्छ है, यह समझते ही सच्चे ज्ञान का द्वार खुल जाता है। लगातार सीखें, खोजें और खुद को बढ़ाएं।