“मैं सोचता हूँ, इसलिए मैं हूँ।”

तुम्हारा अस्तित्व इसलिए है क्योंकि तुम सोचते हो, महसूस करते हो। अपने विचारों को अपनाओ, वे तुम्हें परिभाषित करते हैं।
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“मैं सोचता हूँ, इसलिए मैं हूँ।”

तुम्हारा अस्तित्व इसलिए है क्योंकि तुम सोचते हो, महसूस करते हो। अपने विचारों को अपनाओ, वे तुम्हें परिभाषित करते हैं।