“जीवन में सबसे बड़ी महिमा कभी न गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठने में है।”

गिरना अंत नहीं है। महिमा हर बार उठने में है। उठते रहो!
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“जीवन में सबसे बड़ी महिमा कभी न गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठने में है।”

गिरना अंत नहीं है। महिमा हर बार उठने में है। उठते रहो!