Home
🧠 मन और आत्मा
“मैं हूँ; इसलिए, मैं सोचता हूँ।”
आपका अस्तित्व आपको सोचने और तर्क करने की अनुमति देता है। इस उपहार को संजोएं।
“मैं हूँ इसलिए मैं सोचता हूँ।”
— ऐन रैंड