“प्रेम मानवता की सर्वोच्च कृपा, आत्मा का पवित्रतम अधिकार, वह सुनहरा कड़ी है जो हमें बांधती है।”

प्रेम मानवता का सर्वोच्च गुण है। यह हमें एकजुट करता है और हमें मानव बनाता है।
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“प्रेम मानवता की सर्वोच्च कृपा, आत्मा का पवित्रतम अधिकार, वह सुनहरा कड़ी है जो हमें बांधती है।”

प्रेम मानवता का सर्वोच्च गुण है। यह हमें एकजुट करता है और हमें मानव बनाता है।