“सुख केवल स्वीकृति में ही हो सकता है।”

स्वीकृति ही सुख की कुंजी है। अपने आप को, दूसरों को और अपनी परिस्थितियों को स्वीकार करें ताकि जीवन खुशहाल हो।
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“सुख केवल स्वीकृति में ही हो सकता है।”

स्वीकृति ही सुख की कुंजी है। अपने आप को, दूसरों को और अपनी परिस्थितियों को स्वीकार करें ताकि जीवन खुशहाल हो।