“मैं खुद को नष्ट नहीं कर रहा हूँ, मैं खुद को बना रहा हूँ।”

हम गलतियों और असफलताओं के माध्यम से बढ़ते हैं, और इस प्रक्रिया में, हम खुद को पुनर्गठित करते हैं। यह प्रक्रिया कभी-कभी दर्दनाक होती है, लेकिन यही वास्तविक विकास का मार्ग है।
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“मैं खुद को नष्ट नहीं कर रहा हूँ, मैं खुद को बना रहा हूँ।”

हम गलतियों और असफलताओं के माध्यम से बढ़ते हैं, और इस प्रक्रिया में, हम खुद को पुनर्गठित करते हैं। यह प्रक्रिया कभी-कभी दर्दनाक होती है, लेकिन यही वास्तविक विकास का मार्ग है।