“व्यक्ति जैसा स्वयं को समझता है, उसी के अनुसार बढ़ता है।”

स्वयं को समझना विकास की पहली सीढ़ी है। स्वयं का ईमानदारी से सामना करें और खुद को समझकर बढ़ें।
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“व्यक्ति जैसा स्वयं को समझता है, उसी के अनुसार बढ़ता है।”

स्वयं को समझना विकास की पहली सीढ़ी है। स्वयं का ईमानदारी से सामना करें और खुद को समझकर बढ़ें।